बुधवार, 29 जनवरी 2014

नैतिक दायीत्व

नैतिक दायीत्व 

आज राजनीती मे अधिकाँश रूप से अयोग्य लोग सम्मिलित हो गए है, यदपि कुछ अपवाद भी है !यदि परिस्थिति का आंकलन करे तो ज्ञात होगा कि देश मे  राजनीतिक हालात कोई बहुत अच्छे नहीं है !अपितु यह कहना होगा कि दिन पर दिन राजनीतिक हालात और बिगड़ते ही जा रहे  है जिसके लिए हमारे नेता ही जिम्मेदार है !अब समय आ गया है कि कि नेता अब अपने  उत्तरदायित्वों को अच्छी तरह समझे और बिगड़ते हालात पर काबू पाने का प्रयास करें !नेताओं को इस पर भी विचार करना होगा कि वो अपने पद और भूमिका को समझे तथा उसके अनुरूप कार्य करें एवं अपने नैतिक दायत्वों को भली भांति समझे ,विचार इस पर भी नेताओं को करना होगा कि उनके दायत्वों का पतन क्यों हो रहा है वोह क्यों पथ भ्रष्ट हो गए है !

सर्वोपरि देश हित होना चाहिए किन्तु यहाँ अब व्यक्तिगत स्वार्थ और लाभ तक ही सीमित हो गए नेता आखिरकार कैसे देश का उद्धार करेंगे !अधिकाँश रूप से नेता वोट और कुर्सी के प्रति आसक्त हो गए है !उनकी तमाम चिंतायें वोट बैंक और कुर्सी को बचायें रखने तक ही सिमट कर रह गयी है !राष्ट्र कि एकता और अखंडता को बनायें रखना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गयी है !यदि लोगों के बीच धर्म के आधार पर दरारे पैदा कर दी आज राजनीति के शुद्धीकरण गई तो राष्ट्र कि एकता एवं अखंडता को खतरा पैदा हो जायेगा !यदि नेता ही मर्यादाहीन हो जायेंगे तो देश के भविष्य को अन्धकार मे होने से कौन बचायगा ?आज राजनीति के शुद्धिकरण कि आवशयकता है ,धर्म के अनुरूप आचरण से ही राजनीति का शुद्धिकरण सम्भव है !आज संत का राजनीती से प्रभावित होना साधुत्व का अपमान है !परन्तु यह भी सही है कि आज के दौर मे राजा दशरथ के समय कि राजनीति नहीं हो सकती !लेकिन आदर्श राजनीती आज भी सम्भव है !लाल बहादुर शास्त्री  और अटल विहारी वाजपेयी के रूप मे दो उदहारण सामने है !इन दोनों ही नेताओं का चरित्र अनुकरणीय रहा है !इन दोनों ने ही प्रधानमन्त्री होने के पश्चात भी कभी अपने और अपने परिवार के स्वार्थ हेतु कार्य नहीं किया बल्कि राजनीती को एक नई दिशा दी जो अनुकरणीये थी !

महात्मा गांधी ने जहाँ राजनीती मे अहिंसा और अध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा दिया तो वही शास्त्री और वाजपेयी ने सादा जीवन और उच्च विचार को अपने जीवन का धेय्य  बनाये रखा !आज भी राजनीति मे ऐसे ही लोगों कि आवशयकता है जिनमे लोगों के प्रति लगाव प्रेम तथा त्याग वा बलिदान कि भावना हो !जो अपना घर भरने मे  जुटे है ,वोह देश का हित कभी नहीं कर सकते !

दिनेश सक्सेना

2 टिप्‍पणियां:

  1. नैतिकता का पतन केवल नेताओं का ही नहीं हुआ है, वोटर ज्यादा भ्रष्ट है इसीलिए कभी बिरादरी तो कभी धर्म और कभी दारु की एक बोतल के नाम पर अपना वोट बेच रहा है, नतीजा चोर उचक्के सत्ता के गलियारों तक पहुँच रहे हैं. मुझे लगता है की हमारे स्कूल के पाठ्क्रम में देश हित और राजनीति का चैप्टर जोड़ा जाना चाहिए. वोटर इमानदार होगा तो नेता भी इमानदार होंगे.

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  2. प्रतीक्षा बात सही कह रही हो पर जनता क्या करे उसके पास भी तो सीमित विकल्प है और उसे उनमे से ही चुनना पड़ता है ! हाँ कुछ लोग हो सकते है जो एक शराव की बोतल या फिर चंद रुपया के लिए वोट देते है पर अधिकांश रूप से ऐसा नहीं है ! यह दूसरी बात है की लोग जीतने के बाद अपना चरित्र हरण खुद कर लेते है अपने स्वार्थ वश

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